khatu shyamji prasad

सोनगिरी बावड़ी खंडेला सीकर

सोनगिरी बावड़ी खंडेला सीकर - सीकर जिले के खंडेला कस्बे को बावड़ियों का शहर कहा जाता है. किसी समय में यहाँ 52 बावड़ियाँ हुआ करती थी जिनकी वजह से यहाँ कभी भी पानी की कमी नहीं हुआ करती थी.

भानगढ़ का किला अलवर

भानगढ़ का किला अलवर - भानगढ़ का किला सरिस्का के जंगलों से घिरा हुआ होने के साथ-साथ अपने आप में कई रहस्यमय कथाओं और डरावने इतिहास को समेटे हुए है. इस किले को भारत के ही नहीं बल्कि एशिया के सबसे डरावने स्थानों में शुमार किया जाता है.

पचार का गढ़ दांतारामगढ़ सीकर

पचार का गढ़ दांतारामगढ़ सीकर - सीकर जिले में कई ठिकाने रहे हैं जिनमे से एक ठिकाने का नाम प्रमुखता से लिया जाता है जिसे पचार ठिकाने के नाम से जाना जाता है. यह ठिकाना प्रसिद्ध खाटूश्यामजी कस्बे से लगभग 17 किलोमीटर की दूरी पर है.

सामोद महल चौमूँ जयपुर

सामोद महल चौमूँ जयपुर - जयपुर के आस पास अरावली की पहाड़ियों में जगह-जगह पर स्थित किले, हवेलियाँ, बावड़ियाँ और प्राचीरें इतिहास में दर्ज आमेर रियासत की याद ताजा करा देती है. किसी समय इसी रियासत का एक हिस्सा हुआ करता था सामोद ठिकाना.

त्रिवेणी धाम के संस्थापक संत गंगा दास जी महाराज

त्रिवेणी धाम के संस्थापक संत गंगा दास जी महाराज - श्री गंगादास जी महाराज का जन्म विक्रम संवत 1771 में सीकर जिले के अजीतगढ़ कस्बे के निकट अथौरा ग्राम में हुआ.

श्री श्री 1008 पद्मश्री संत नारायणदासजी महाराज

श्री श्री 1008 पद्मश्री संत नारायणदासजी महाराज - त्रिवेणी धाम एक पावन तीर्थ स्थल है जिसकी स्थापना संत गंगादासजी ने सत्रहवीं शताब्दी में की थी. यह स्थल विभिन्न तेजस्वी संतों की तपोभूमि रहा है.

लोहार्गल की कथा

लोहार्गल की कथा - लोहार्गल का सम्बन्ध भगवान विष्णु, भगवान परशुराम, भगवान सूर्यदेव एवं पांडवों के साथ किस तरह से रहा है इसके पीछे की कथा संक्षेप में इस प्रकार है.

त्रिवेणी धाम शाहपुरा जयपुर

त्रिवेणी धाम शाहपुरा जयपुर - जयपुर दिल्ली हाईवे पर शाहपुरा के निकट अरावली पर्वतमाला के बीच तीन नदियों के संगम स्थल पर त्रिवेणी धाम स्थित है. शाहपुरा से यहाँ की दूरी दस किलोमीटर एवं जयपुर से लगभग 72 किलोमीटर है.

शाकम्भरी माता मंदिर सकराय सीकर

शाकम्भरी माता मंदिर सकराय सीकर - देश में शाकम्भरी माता की तीन शक्तिपीठ हैं जिनमे एक सीकर जिले के सकराय गाँव में दूसरी सांभर जिले के समीप शाकम्भर नामक जगह पर एवं तीसरी उत्तरप्रदेश के मेरठ के पास सहारनपुर से 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.

सलेदीपुरा का गढ़ खंडेला सीकर

सलेदीपुरा का गढ़ खंडेला सीकर - महाभारतकालीन खंडेला रियासत धार्मिक एवं ऐतिहासिक विरासतों से भरी पड़ी है. आज हम इस रियासत के सलेदीपुरा ग्राम में स्थित ऐतिहासिक गढ़ की यात्रा करते हैं. इस गढ़ को सलेदीपुरा फोर्ट या सलेदीपुरा के किले के नाम से भी जाना जाता है.

तीर्थ गुरु लोहार्गल धाम झुंझुनू

तीर्थ गुरु लोहार्गल धाम झुंझुनू - शेखावाटी क्षेत्र में स्थित लोहार्गल तीर्थ का धार्मिक महत्व पुष्कर के बाद में सबसे अधिक माना जाता है. जिस प्रकार पुष्कर को तीर्थ राज की संज्ञा दी गई है उसी प्रकार लोहार्गल को गुरु तीर्थ की संज्ञा दी गई है. लोहार्गल तीर्थ को 68 तीर्थों का गुरु तीर्थ माना जाता है. इस स्थान का उल्लेख पुराणों में भी मिलता है.

मंडावा का किला मंडावा झुंझुनू

मंडावा का किला मंडावा झुंझुनू - झुंझुनू जिले में कई कस्बे ऐतिहासिक रूप से समृद्ध हैं जिनमे एक कस्बा है मंडावा. यह कस्बा पुरानी हवेलियों और एक किले को धरोहरों के रूप में अपने आगोश में समेटे हुए है.

सांवलिया सेठ मंदिर चित्तौड़गढ़

व्यापार में भागीदार बनते हैं चित्तौड़गढ़ के सांवलिया सेठ - ऐसा माना जाता है कि नानी बाई का मायरा भरने के लिए स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने सांवलिया सेठ का रूप धरा था.

मनसा माता मंदिर झुंझुनू

मनसा माता मंदिर झुंझुनू - झुंझुनू जिले की उदयपुरवाटी तहसील के खोह गाँव की अरावली की पहाड़ियों की गुफा में मनसा माता शक्ति पीठ धाम स्थित है.

रानी सती दादी की कहानी

रानी सती दादी की कहानी - पौराणिक मान्यता के अनुसार जब महाभारत के युद्ध में अर्जुन पुत्र अभिमन्यु वीर गति को प्राप्त हो गए थे तब अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा ने अभिमन्यु की चिता के साथ सती होने का निर्णय लिया.

रानी सती दादी मंदिर झुंझुनू

रानी सती दादी मंदिर झुंझुनू - शेखावाटी के झुंझुनू शहर के बीचों-बीच स्त्री शक्ति की प्रतीक और माँ दुर्गा के अवतार के रूप में पहचाने जाने वाली रानी (राणी) सती का मंदिर स्थित है. रानी सती को रानी सती दादी के नाम से भी जाना जाता है.

धोद का किला धोद सीकर

धोद का किला धोद सीकर - सीकर जिले में कई गढ़ और किले मौजूद हैं जिनमे एक प्रमुख गढ़ है धोद का गढ़ जिसे धोद फोर्ट के नाम से भी जाना जाता है. यह फोर्ट सीकर रेलवे स्टेशन से लगभग 23 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.

मुकुंदगढ़ का गढ़ मुकन्दगढ़ झुंझुनू

मुकुंदगढ़ का गढ़ मुकन्दगढ़ झुंझुनू - मुकुंदगढ़ या मुकन्दगढ़ (Mukundgarh or Mukandgarh) का पुराना नाम साहबसर (Shahabsar) था. बाद में इसे ठाकुर मुकुंद सिंह साहब ने वर्ष 1860 में सेठ सेवक राम गुहालेवाला (Sevek Ram Guhalewala) की मदद से बदल कर मुकुंद गढ़ कर दिया.