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सांवलिया सेठ मंदिर चित्तौड़गढ़

व्यापार में भागीदार बनते हैं चित्तौड़गढ़ के सांवलिया सेठ - ऐसा माना जाता है कि नानी बाई का मायरा भरने के लिए स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने सांवलिया सेठ का रूप धरा था.

मनसा माता मंदिर झुंझुनू

मनसा माता मंदिर झुंझुनू - झुंझुनू जिले की उदयपुरवाटी तहसील के खोह गाँव की अरावली की पहाड़ियों की गुफा में मनसा माता शक्ति पीठ धाम स्थित है.

रानी सती दादी की कहानी

रानी सती दादी की कहानी - पौराणिक मान्यता के अनुसार जब महाभारत के युद्ध में अर्जुन पुत्र अभिमन्यु वीर गति को प्राप्त हो गए थे तब अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा ने अभिमन्यु की चिता के साथ सती होने का निर्णय लिया.

रानी सती दादी मंदिर झुंझुनू

रानी सती दादी मंदिर झुंझुनू - शेखावाटी के झुंझुनू शहर के बीचों-बीच स्त्री शक्ति की प्रतीक और माँ दुर्गा के अवतार के रूप में पहचाने जाने वाली रानी (राणी) सती का मंदिर स्थित है. रानी सती को रानी सती दादी के नाम से भी जाना जाता है.

धोद का किला धोद सीकर

धोद का किला धोद सीकर - सीकर जिले में कई गढ़ और किले मौजूद हैं जिनमे एक प्रमुख गढ़ है धोद का गढ़ जिसे धोद फोर्ट के नाम से भी जाना जाता है. यह फोर्ट सीकर रेलवे स्टेशन से लगभग 23 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.

मुकुंदगढ़ का गढ़ मुकन्दगढ़ झुंझुनू

मुकुंदगढ़ का गढ़ मुकन्दगढ़ झुंझुनू - मुकुंदगढ़ या मुकन्दगढ़ (Mukundgarh or Mukandgarh) का पुराना नाम साहबसर (Shahabsar) था. बाद में इसे ठाकुर मुकुंद सिंह साहब ने वर्ष 1860 में सेठ सेवक राम गुहालेवाला (Sevek Ram Guhalewala) की मदद से बदल कर मुकुंद गढ़ कर दिया.

हर्षनाथ भैरव मंदिर हर्ष गिरि पर्वत सीकर

हर्षनाथ भैरव मंदिर हर्ष गिरि पर्वत सीकर - सीकर शहर से लगभग 15 किलोमीटर दूर हर्षगिरि के पहाड़ पर हर्षनाथ भैरव का प्राचीन मंदिर स्थित है. इस मंदिर के पास प्रसिद्द हर्षनाथ शिव के मूल मंदिर के साथ-साथ उत्तर मध्यकालीन मंदिर भी स्थित है.

हर्षनाथ शिव मंदिर हर्ष गिरि पर्वत सीकर

हर्षनाथ शिव मंदिर हर्ष गिरि पर्वत सीकर - विभिन्न कालों में शेखावाटी की धरा पर अलग-अलग राजवंशों का शासन रहा है. लगभग एक हजार वर्ष पूर्व यह क्षेत्र तत्कालीन शाकम्भरी (सांभर) के प्रतापी चौहान शासकों के अधीन था.

जीण और हर्ष की कहानी

जीण और हर्ष की कहानी - चौहान नरेश की पुत्री जीण आज की विख्यात जीण माता कैसे बन गई इसके पीछे एक लम्बी और भावविहल कर देने वाली कहानी है.

कृष्ण भक्त करमेती बाई की कथा

कृष्ण भक्त करमेती बाई की कथा - करमेती बाई का जन्म खंडेला कस्बे के ब्रह्मपुरी मोहल्ले में हुआ था. इनके पिता का नाम पशुराम काथड़िया था जो खंडेला के शेखावत राजा के दरबार में राजपुरोहित थे.

जीण माता मंदिर जीणधाम सीकर

जीण माता मंदिर जीणधाम सीकर - जीण माता का मंदिर अरावली की सुरम्य पहाड़ियों के बीच में स्थित है. यह मंदिर सीकर से लगभग 25 किलोमीटर तथा जयपुर से लगभग 108 किलोमीटर की दूरी पर है. खाटूश्यामजी मंदिर से इसकी दूरी लगभग 29 किलोमीटर है.

धार्मिक एवं ऐतिहासिक धरोहरों के लिए मशहूर है खंडेला

धार्मिक एवं ऐतिहासिक धरोहरों के लिए मशहूर है खंडेला - सीकर जिले में स्थित खंडेला कस्बा धार्मिक एवं ऐतिहासिक धरोहरों की स्थली के साथ-साथ बहुत से समाजों की जन्म स्थली भी है. हजारों वर्ष पुराने इस कस्बे ने अपने आगोश में कई ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासतों को छुपा कर रखा है.

प्राचीन श्याम मंदिर मूंडरु सीकर

प्राचीन श्याम मंदिर मूंडरु सीकर – सीकर जिले के श्रीमाधोपुर तहसील में स्थित मूंडरु कस्बा धार्मिक एवं ऐतिहासिक रूप से काफी प्रसिद्ध है. कस्बे के बीचों-बीच श्याम बाबा का मंदिर है जिसे प्राचीन श्याम मंदिर के नाम से जाना जाता है.

ऐतिहासिक दरवाजा और बालाजी का मंदिर श्रीमाधोपुर सीकर

ऐतिहासिक दरवाजा और बालाजी का मंदिर श्रीमाधोपुर सीकर - श्रीमाधोपुर नगर की स्थापना 1761 ईस्वी में वैशाख शुक्ल तृतीय (अक्षय तृतीय) के दिन जयपुर राज दरबार के प्रधान दीवान बोहरा राजा श्री खुशाली राम जी ने ऐतिहासिक खेजड़ी के वृक्ष के नीचे की थी.

गोपीनाथजी मंदिर श्रीमाधोपुर सीकर

गोपीनाथजी मंदिर श्रीमाधोपुर सीकर - श्रीमाधोपुर में गोपीनाथजी का मंदिर अपनी प्राचीनता एवं वास्तु शैली के लिए प्रसिद्ध है. मंदिर की नींव कस्बे की स्थापना के समय ही अक्षय तृतीया के दिन 1761 ईस्वी (विक्रम संवत् 1818) में रखी गई.

कायथवाल बावड़ी श्रीमाधोपुर सीकर

कायथवाल बावड़ी श्रीमाधोपुर सीकर - श्रीमाधोपुर शहर में दरवाजे वाले बालाजी से कुछ आगे जाने पर एक ऐतिहासिक बावड़ी स्थित है जो कि इस कस्बे की ही नहीं वरन आस पास के पूरे क्षेत्र की एकमात्र बावड़ी है। आस पास के क्षेत्रों में इस बावड़ी के अतिरिक्त दूसरी कोई बावड़ी नहीं है।

रघुनाथ मंदिर श्रीमाधोपुर सीकर

रघुनाथ मंदिर श्रीमाधोपुर सीकर - रघुनाथ जी का मंदिर श्रीमाधोपुर कस्बे के मध्य में राजपथ पर राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सामने स्थित है। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस मंदिर का निर्माण गोविन्दगढ़ निवासी कानूनगो परिवार ने श्रीमाधोपुर की स्थापना के समय ही करवाया था।

महावीर दल अखाड़ा श्रीमाधोपुर सीकर

महावीर दल अखाड़ा श्रीमाधोपुर सीकर - श्री महावीर दल श्रीमाधोपुर कस्बे में दरवाजे वाले बालाजी के सामने स्थित है तथा इसे “अखाड़ा” के नाम से भी जाना जाता है। अपनी स्थापना के समय से ही यह मुख्यतया सामाजिक तथा धार्मिक कार्यों के साथ-साथ स्वास्थ्य सम्बंधित गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है।