Shrimadhopur or Srimadhopur

Shrimadhopur (Shri Madhopur) or Srimadhopur (Sri Madhopur) is a subdivision in Sikar district. Its distance from district headquarter is 60 kilometers and from the capital of Rajasthan is 75 kilometers. It was founded on Vaishak Shukla Tritiya (Akshay Tritiya) in 1761 AD by chief Diwan of Jaipur estate Mr Khushali Ram Bohra of Noppura. The architecture of Shrimadhopur is similar to Jaipur so we can say that its design is a replica of Jaipur. As in Jaipur, all roads intersect each other at 90 degree angle, same position in Shrimadhopur also. All facilities and government offices are located here, including Railway Station (SMPR), Bus Stand, Municipality, Tehsil, SDM office, Krishi Upaj Mandi etc. The population of the city is approximately fifty thousand.

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History of Shrimadhopur

श्रीमाधोपुर कस्बा सीकर जिले में स्थित है जो कि जयपुर से लगभग 75 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। व्यापारिक तथा सांस्कृतिक रूप से यह कस्बा अत्यंत सम्रद्धशाली रहा है। किसी समय कृषि तथा बर्तनों के लिए प्रसिद्ध यह कस्बा अब धीरे-धीरे अन्य क्षेत्रों में भी प्रगति के पथ पर अग्रसर है। जयपुर नगर की स्थापना 1727 ईसवी में सवाई जयसिंह द्वितीय द्वारा की गई थी। चोमूं, अमरसर, अजीतगढ़, मूंडरू, मऊ, दिवराला, खंडेला तथा आसपास का क्षेत्र जयपुर राजदरबार के अंतर्गत आता था।

सवाई माधोसिंह प्रथम (1750 से 1768) के शासन काल में वर्तमान श्रीमाधोपुर के पास हाँसापुर तथा फुसापुर, जिनको वर्तमान में हाँसपुर तथा पुष्पनगर के नाम से जाना जाता है, के सामंतो ने 1760-61 ईसवी के लगभग विद्रोह करके कर देना बंद कर दिया। महाराजा सवाई माधोसिंह ने इन विद्रोही सामंतो का दमन कर लगान प्राप्त करने के लिए अपने प्रधान दीवान नोपपुरा निवासी बोहरा राजा श्री खुशाली राम जी को सैन्य टुकड़ी के साथ भेजा। उस समय दीवान वित्तीय कार्य करने के अतिरिक्त सैन्य अभियानों में भी भाग लिया करते थे।

खुशाली राम जी ने वर्तमान कचियागढ़ स्थान पर पहुँच कर अपना शिविर लगाया तथा उस स्थान पर एक कच्चा गढ़ भी बनवाया। उसके पश्चात उन्होंने हाँसापुर तथा फुसापुर पर आक्रमण कर उनके सामंतो को परास्त करके कर देते रहने की शर्त स्वीकार करवाई। वर्तमान में चौपड़ बाजार में जिस जगह शिवालय स्थित है, पहले उस जगह पर एक तालाब हुआ करता था। बोहरा जी ने इस तालाब की पाल पर एक खेजड़ी की डाली आरोपित की जो कि धीरे-धीरे हरी भरी होकर वृक्ष का रूप लेने लग गई।

इस प्रकार की ऊर्वरा भूमि को देखकर बोहरा जी के मन में यहाँ पर नगर बसाने की अभिलाषा जागृत हुई। तत्पश्चात 1761 में वैशाख शुक्ल तृतीया (अक्षय तृतीया) को बोहरा राजा श्री खुशाली राम जी ने श्रीमाधोपुर नगर की स्थापना उसी खेजड़ी के वृक्ष की जगह पर की। यह खेजड़ी का पेड़ आज भी नगर के बीचो बीच चौपड़ बाजार में शिवालय के पीछे तथा हनुमान मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति के निकट स्थित है। यह पेड़ श्रीमाधोपुर के विकास का एक मूक गवाह है जो विगत ढाई शताब्दी से भी अधिक समय से श्रीमाधोपुर के इतिहास को अपने आगोश में समेटे निशब्द खड़ा है।

यह पेड़ एक पेड़ ना होकर श्रीमाधोपुर की धरोहर है जिसे श्रीमाधोपुर वासियों की उपेक्षा के पश्चात पता नहीं किस शक्ति ने अभी भी हरा भरा रखकर खड़ा कर रखा है। यह पेड़ श्रीमाधोपुर की पहचान होनी चाहिए थी परन्तु ना तो स्थानीय प्रशासन और ना ही श्रीमाधोपुर के किसी निवासी को अपनी इस धरोहर की परवाह है। इस नगर का नाम जयपुर महाराजा सवाई माधोसिंह के नाम पर श्रीमाधोपुर रखा गया। वैसे भी श्री माधव का सम्बन्ध लक्ष्मी नारायण भगवान से होता है तथा नामकरण के वक्त इस बात का भी विशेष ध्यान रखा गया था।

श्रीमाधोपुर नगर का विन्यास नगर नियोजन की वैज्ञानिक पद्धति को पूर्णतया ध्यान में रखकर किया गया था। नगर के चारों तरफ परकोटा बनाना तय हुआ तथा उसके लिए चारों दिशाओं में बारह बुर्ज तथा चार विशाल दरवाजों का निर्माण करवाया जाना था। प्रथम दरवाजे का निर्माण नगर के दक्षिण में हुआ तथा उसमे बालाजी का मंदिर भी स्थापित हुआ जिसके कारण इसे दरवाजे वाले बालाजी के नाम से जाना जाता है। श्रीमाधोपुर को बसाते समय जयपुर का नक्शा ध्यान में रखा गया था। जिस प्रकार जयपुर में सभी सड़के एक दूसरे को समकोण पर काटती है ठीक उसी प्रकार श्रीमाधोपुर में भी सभी सड़के समकोण पर काटती है। नगर नियोजन में श्रीमाधोपुर को जयपुर की प्रतिकृति भी कहा जा सकता है।

सर्वप्रथम श्री गोपीनाथजी का मंदिर, गढ़, पंडित खुशाली राम मिश्र की हवेली तथा चौपड़ में बड़ा शिवालय आदि के निर्माण कार्य को प्रारंभ करवाकर नगर की स्थापना के कार्य को शुरू किया गया। आज श्रीमाधोपुर नगर ढाई सदियों से भी अधिक पुराना हो चुका है। हम सभी को इसके इतिहास से परिचित होकर इसकी धरोहरों को सहेज कर रखने की आवश्यकता है तथा जिसके लिए सभी श्रीमाधोपुर वासियों को प्रयासरत रहना होगा। आधुनिकीकरण की आँधी से सभी ऐतिहासिक स्थानों को बचाकर उन्हें अपने मौलिक स्वरुप में रखना हम सभी की जिम्मेदारी है जिसे हम सभी को निस्वार्थ निभाना होगा।

सभी श्रीमाधोपुर वासियों को प्रत्येक अक्षय तृतीया के दिन शिवालय में खेजड़ी के वृक्ष के नीचे इकठ्ठा होकर इस दिन को धूमधाम से श्रीमाधोपुर की स्थापना दिवस के रूप में मनाना चाहिए।

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FREQUENTLY ASKED QUESTIONS

Here You Will Find The Answers Of Your Most Asked Questions

1. What about the location of Shrimadhopur?

Shrimadhopur is located about 12 kilometers distant from Jaipur Bikaner National Highway Number 52 in Sikar district. Nearest Railway Station is Shrimadhopur, nearest Railway Junction is Reengus or Ringas and nearest airport is Jaipur International Airport.

2. What is the history of Shrimadhopur?

Shrimadhopur is founded on Akshay Tratiya in 1761 by Jaipur Rajdarbar Diwan Bohra Raja Khushali Ram of Noppura. He planted a Khejri (Khejdi) tree at present Shiv Temple in Chaupar Bazar for the foundation of the town.

3. When is the foundation Day of Shrimadhopur?

Every Akshay Tratiya is celebrated as the foundation day of Shrimadhopur town.

4. What is the speciality of Shrimadhopur?

Architecture of Shrimadhopur is similar to Jaipur. As all roads in Jaipur intersects at right angle, all roads in Shrimadhopur also intersect at 90 degrees. It is the replica of Jaipur. It was a famous market for clothes and utensils (Bartan). Anaj Mandi or Krishi Upaj Mandi was number one for barley (Jau) in Asia.

5. Who is the MLA of Shrimadhopur?

Mr Dipendra Shingh Shekhawat is present MLA of Shrimadhopur. He belongs to India National Congress (INC).

6. Who is the Chairman (Nagarpalika Adhyaksh) of Shrimadhopur?

Mr Harinarayan Mahant is presently Chairman of Nagarpalika. He belongs to the Bhartiya Janta Party (BJP).

7. What are the places to visit in Shrimadhopur?

The main attractions in Shrimadhopur are Kayathwal Stepwell, Burjs, Garh (Fortress), Bhooton Ki Chhatri, Prachin Chhatri, Darwaje wale Balaji and Ancient Darwaja, Gopinath Mandir, Raghunath Mandir, Panchmukhi Shiv Mandir, Sitaram Baba Ashram, Atmanand Bal Brahmchari Baba Ashram, Sant Keshav Das Samadhi, Bhairav Mandir Jalpali, Tiddinath Ashram, Haridas Bagichi, Digambhara Ashram, Naulakha Mandir etc.

8. What are the places to visit nearby Shrimadhopur?

There are various tourist attractions nearby Shrimadhopur such as Mundru Shyam Mandir, Mundru Dungri, Khatu Shyam Mandir, Reengus Fort, Bhairav Mandir Reengus, Jeen Mata Mandir, Chamunda Mata Mandir Khandela, Fort Khandela, Ajeetgarh Fort etc.

9. Who is the founder of Shrimadhopur.com

Mr. Ramesh Sharma is the founder of Shrimadhopur.com. He launched this website on 28 May 2017 for ever citizen to use this platform for their writing skills. Mr Ramesh Sharma is well qualified person with M Pharm, MSc in Computer Science, PGDCA, MA in History and CHMS degrees.