इस दरवाजे के पास शहीद हुए थे कई योद्धा - Kala Darwaja Khandela in Hindi

इस दरवाजे के पास शहीद हुए थे कई योद्धा - Kala Darwaja Khandela in Hindi, इसमें खंडेला बड़ा पाना गढ़ के बाहर काले दरवाजे के बारे में जानकारी दी गई है।



खंडेला की ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल है एक दरवाजा, जिसे काले दरवाजे के नाम से जाना जाता है। इस दरवाजे का ऐतिहासिक रूप से काफी महत्व है।

यह दरवाजा बड़ा पाना गढ़ के सामने बना हुआ है और इस दरवाजे के जरिये ही बड़ा पाना गढ़ तक पहुँचा जा सकता है। इसे हम बड़ा पाना गढ़ का मुख्य प्रवेश द्वार भी कह सकते हैं।

आज यह दरवाजा जर्जर हालत में पहुँच गया है और इसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है। वक्त के थपेड़े इसे निरंतर कमजोर कर रहे हैं।

दरवाजा काफी बड़ा है जिसमें अन्दर की तरफ रहने के लिए कमरे भी बने हुए हैं। बाहर की तरफ सुन्दर झरोखे बने हुए हैं।

इसे देखकर ऐसा लगता है जैसे किसी समय यहाँ पर हर समय सैनिकों का कड़ा पहरा रहता होगा। इस दरवाजे का नाम काला दरवाजा होने के पीछे एक घटना को बताया जाता है।

बताया जाता है कि सत्रहवीं शताब्दी में जब औरंगजेब ने हिन्दू धर्मस्थलों को तोड़ने का अभियान चला रखा था, तब इस कार्य के लिए उसने अपने सेनापति सेनापति दराब खाँ को शेखावाटी क्षेत्र में भेजा।

दराब खाँ ने खंडेला के मंदिरों पर आक्रमण किया जिसको रोकने के लिए खंडेला के राजा बहादुर सिंह के साथ छापोली के राजा सुजान सिंह सहित लगभग 300 राजपूत योद्धा आगे आए।

चैत्र के महीने में विक्रम संवत 1736 यानी 1679 ईस्वी में बड़ा पाना गढ़ के काले दरवाजे के पास भयानक युद्ध हुआ जिसमें सभी राजपूत योद्धा शहीद हुए। इस घटना के बाद में इस दरवाजे को काले दरवाजे के नाम से जाना जाने लगा।

इस दरवाजे के आसपास की भूमि में उन वीरों का रक्त मिला हुआ है जिन्होंने अपने धार्मिक स्थलों को नष्ट होने से बचाने के लिए अपने प्राण त्याग दिए थे। लेकिन अब यह बात बहुत कम लोगों को ही पता है।

प्रशासन को इन धरोहरों का संरक्षण कर उस इतिहास को भी चित्रित करना चाहिए जिसे देखकर यहाँ के बाशिंदे अपने पुरखों पर गर्व कर सकें।

अगर आप प्राचीन धरोहरों को करीब से देखकर उन्हें जानने के इच्छुक हैं तो आपको खंडेला में स्थित इस ऐतिहासिक स्मारक को अवश्य देखना चाहिए।

काले दरवाजे की मैप लोकेशन - Map Location of Kala Darwaja



काले दरवाजे का वीडियो - Video of Kala Darwaja



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डिस्क्लेमर (Disclaimer)

इस लेख में शैक्षिक उद्देश्य के लिए दी गई जानकारी विभिन्न ऑनलाइन एवं ऑफलाइन स्रोतों से ली गई है जिनकी सटीकता एवं विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। आलेख की जानकारी को पाठक महज सूचना के तहत ही लें क्योंकि इसे आपको केवल जागरूक करने के उद्देश्य से लिखा गया है। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।
रमेश शर्मा

नमस्ते! मेरा नाम रमेश शर्मा है। मैं एक रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट हूँ और मेरी शैक्षिक योग्यता में M Pharm (Pharmaceutics), MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA और CHMS शामिल हैं। मुझे भारत की ऐतिहासिक धरोहरों और धार्मिक स्थलों को करीब से देखना, उनके पीछे छिपी कहानियों को जानना और प्रकृति की गोद में समय बिताना बेहद पसंद है। चाहे वह किला हो, महल, मंदिर, बावड़ी, छतरी, नदी, झरना, पहाड़ या झील, हर जगह मेरे लिए इतिहास और आस्था का अनमोल संगम है। इतिहास का विद्यार्थी होने की वजह से प्राचीन धरोहरों, स्थानीय संस्कृति और इतिहास के रहस्यों में मेरी गहरी रुचि है। मुझे खास आनंद तब आता है जब मैं कलियुग के देवता बाबा खाटू श्याम और उनकी पावन नगरी खाटू धाम से जुड़ी ज्ञानवर्धक और उपयोगी जानकारियाँ लोगों तक पहुँचा पाता हूँ। इसके साथ मुझे अलग-अलग एरिया के लोगों से मिलकर उनके जीवन, रहन-सहन, खान-पान, कला और संस्कृति आदि के बारे में जानना भी अच्छा लगता है। साथ ही मैं कई विषयों के ऊपर कविताएँ भी लिखने का शौकीन हूँ। एक फार्मासिस्ट होने के नाते मुझे रोग, दवाइयाँ, जीवनशैली और हेल्थकेयर से संबंधित विषयों की भी अच्छी जानकारी है। अपनी शिक्षा और रुचियों से अर्जित ज्ञान को मैं ब्लॉग आर्टिकल्स और वीडियो के माध्यम से आप सभी तक पहुँचाने का प्रयास करता हूँ। 📩 किसी भी जानकारी या संपर्क के लिए आप मुझे यहाँ लिख

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