एक ही रंग कविता - Ek Hi Rang Poem

Ek Hi Rang Poem, इसमें भारत के अलग-अलग जाती और धर्म के लोगों को आपस में मिलकर रहने के लिए एक ही रंग नामक कविता से संदेश दिया गया है।

Ek Hi Rang Poem

एक ही रंग कविता के बोल - Lyrics of Ek Hi Rang Poem


हम सब एक ही रंग, एक ही धूप छाँव,
नाम अलग हो सकते, दिल का एक ही भाव।
ना ऊँच-नीच की बात, ना दीवारों का जाल,
पढ़ना-लिखना सबका हक़, यही है असली सवाल।

काग़ज़ पर कानून लिखा,
सपना सुंदर सा दिखा।
कॉलेज में कोई भेद न हो,
हर बच्चा आगे बढ़ा।

पर किताबों से आगे भी,
समझ ज़रा गहरी हो,
कानून तभी काम करे,
जब सोच भी सही हो।

हम सब एक ही रंग, एक ही धूप छाँव,
नाम अलग हो सकते, दिल का एक ही भाव।
ना ऊँच-नीच की बात, ना दीवारों का जाल,
पढ़ना-लिखना सबका हक़, यही है असली सवाल।


अगर नियम में छेद रहे,
तो अन्याय छुप जाता है,
बोलने से डर लगता है,
सच भी चुप हो जाता है।

कानून बने तो ऐसा हो,
जो सबको साथ चलाए,
कमज़ोरी दिखे जहाँ भी,
वहाँ सुधार सिखाए।

ना कोई छोटा, ना कोई बड़ा,
क्लास में सब बराबर,
मेहनत से जो आगे बढ़े,
वही बने उज्ज्वल सितारा।

जाति नहीं, बस इंसान देखो,
यही पढ़ाई का सार,
भाईचारे की भाषा बोले,
हर कॉलेज, हर दीवार।

हम सब एक ही रंग, एक ही धूप छाँव,
भारत हम सबका घर है, यही रखो याद।
कानून सुधरे, सोच सुधरे,
तब बदलेगा हाल,
साथ चलेंगे, साथ बढ़ेंगे,
यही है नया कमाल।

एक ही रंग कविता का वीडियो - Video of Ek Hi Rang Poem



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डिस्क्लेमर (Disclaimer)

इस कविता की समस्त रचनात्मक सामग्री रमेश शर्मा की मौलिक रचना है। कविता में व्यक्त विचार, भावनाएँ और दृष्टिकोण लेखक के स्वयं के हैं। इस रचना की किसी भी प्रकार की नकल, पुनर्प्रकाशन या व्यावसायिक उपयोग लेखक की लिखित अनुमति के बिना वर्जित है।
Ramesh Sharma

नमस्ते! मेरा नाम रमेश शर्मा है। मैं एक रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट हूँ और मेरी शैक्षिक योग्यता में M Pharm (Pharmaceutics), MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA और CHMS शामिल हैं। मुझे भारत की ऐतिहासिक धरोहरों और धार्मिक स्थलों को करीब से देखना, उनके पीछे छिपी कहानियों को जानना और प्रकृति की गोद में समय बिताना बेहद पसंद है। चाहे वह किला हो, महल, मंदिर, बावड़ी, छतरी, नदी, झरना, पहाड़ या झील, हर जगह मेरे लिए इतिहास और आस्था का अनमोल संगम है। इतिहास का विद्यार्थी होने की वजह से प्राचीन धरोहरों, स्थानीय संस्कृति और इतिहास के रहस्यों में मेरी गहरी रुचि है। मुझे खास आनंद तब आता है जब मैं कलियुग के देवता बाबा खाटू श्याम और उनकी पावन नगरी खाटू धाम से जुड़ी ज्ञानवर्धक और उपयोगी जानकारियाँ लोगों तक पहुँचा पाता हूँ। इसके साथ मुझे अलग-अलग एरिया के लोगों से मिलकर उनके जीवन, रहन-सहन, खान-पान, कला और संस्कृति आदि के बारे में जानना भी अच्छा लगता है। साथ ही मैं कई विषयों के ऊपर कविताएँ भी लिखने का शौकीन हूँ। एक फार्मासिस्ट होने के नाते मुझे रोग, दवाइयाँ, जीवनशैली और हेल्थकेयर से संबंधित विषयों की भी अच्छी जानकारी है। अपनी शिक्षा और रुचियों से अर्जित ज्ञान को मैं ब्लॉग आर्टिकल्स और वीडियो के माध्यम से आप सभी तक पहुँचाने का प्रयास करता हूँ। 📩 किसी भी जानकारी या संपर्क के लिए आप मुझे यहाँ लिख

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