Bheem Ki Katori Balaji Dham Mundru, इसमें मूंडरू कस्बे की एक रहस्यमयी पहाड़ी के बारे में जानकारी दी गई है जिसे स्थानीय लोग भीम की कटोरी मानते हैं।
क्या आपने कभी एक ही पत्थर से बनी पूरी पहाड़ी देखी है?
राजस्थान के सीकर जिले के मूंडरू कस्बे में एक ऐसी ही रहस्यमयी पहाड़ी मौजूद है, जिसे लोग आज भी “भीम की कटोरी” के नाम से जानते हैं।
कहा जाता है कि यह पूरी पहाड़ी एक ही पत्थर से बनी हुई है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि अगर इस पहाड़ी के पत्थर को किसी चीज़ से ठोका जाए, तो अंदर से खोखली जैसी आवाज़ सुनाई देती है। इसी वजह से कई लोग मानते हैं कि यह पहाड़ी अंदर से खाली हो सकती है।
लोककथा के अनुसार, महाभारत के बलशाली योद्धा भीम यहाँ कहीं खीर बना रहे थे। लेकिन जब खीर उफन गई तो क्रोधित होकर भीम ने अपनी कटोरी उल्टी करके जमीन पर रख दी। मान्यता है कि वही कटोरी आज एक विशाल पहाड़ी के रूप में दिखाई देती है, इसलिए इसे कहा जाता है — “भीम की कटोरी”।
स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि इस कटोरी का ढक्कन भी मौजूद है। पहाड़ी से लगभग 1 किलोमीटर दूर एक बड़ा पत्थर पड़ा हुआ है, जिसे लोग कटोरी का ढक्कन मानते हैं।
इतिहास की दृष्टि से भी यह स्थान काफी महत्वपूर्ण रहा है। प्राचीन समय में इस पहाड़ी के ऊपर छोटे किले के रूप में एक सैन्य चौकी बनी हुई थी, जो खंडेला राजदरबार के अधीन थी। यहाँ राजकुमारों को मिलिट्री कमांडर बनने की ट्रेनिंग दी जाती थी। आज भी इस चौकी के कुछ अवशेष पहाड़ी पर देखे जा सकते हैं।
पुराने समय में इस पहाड़ी के चारों ओर एक नदी बहती थी, जिससे यह पहाड़ी अंगूठी (मुंदरी) की तरह दिखाई देती थी। इसी कारण इसे पहले “मुंदरी डूंगरी” कहा जाता था और बाद में इसी नाम से पास में बसे कस्बे का नाम पड़ गया — मूंडरू।
इतिहासकारों के अनुसार, पंद्रहवीं शताब्दी के अंतिम समय में रानोली के ठाकुर हरदेराम सिंह यहाँ आए और उन्होंने 1595 ईस्वी (विक्रम संवत 1652) में इस पहाड़ी के दक्षिण दिशा में मूंडरू कस्बे की स्थापना करवाई।
इस रहस्यमयी पहाड़ी पर लगभग 400 साल पुराना बालाजी मंदिर भी स्थित है। सबसे खास बात यह है कि इस मंदिर में बालाजी की प्रतिमा मिट्टी से बनी हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले यहाँ कई तपस्वी और साधु साधना किया करते थे।
आज भी यह पहाड़ी लोगों के लिए एक रहस्य बनी हुई है, क्योंकि—
🔸 पूरी पहाड़ी एक ही पत्थर की मानी जाती है
🔸 पत्थर को ठोकने पर खोखली आवाज़ आती है
🔸 इसका आकार उल्टी कटोरी जैसा दिखाई देता है
इसी कारण लोग आज भी इसे कहते हैं —
“मूंडरू की रहस्यमयी भीम की कटोरी।”
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डिस्क्लेमर (Disclaimer)
इस लेख में शैक्षिक उद्देश्य के लिए दी गई जानकारी विभिन्न ऑनलाइन एवं ऑफलाइन स्रोतों से ली गई है जिनकी सटीकता एवं विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। आलेख की जानकारी को पाठक महज सूचना के तहत ही लें क्योंकि इसे आपको केवल जागरूक करने के उद्देश्य से लिखा गया है। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।
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Tourism
