फूलों को महक कविता - Phoolon Ko Mahak Poem

Phoolon Ko Mahak Poem, इसमें फूलों को महक नामक शीर्षक से एक कविता है जिसमें इंसान के जीवन के संघर्षों से लड़ते हुए आशावादी जीवन जीने की प्रेरणा दी है।

Phoolon Ko Mahak Poem

फूलों को महक कविता के बोल - Lyrics of Phoolon Ko Mahak Poem


फूलों को महक दी कुदरत ने,
काँटों को हमें महकाना है,
जो काम किसी से हो ना सका,
वो काम हमें कर जाना है।

हवा से लड़ेंगे हम ऐसे,
जैसे जिंदा जज़्बा हो कोई,
किस्मत के लिखे को बदलने,
अब खुद को हमें आज़माना है…

सूरज से उजाला क्यों माँगे,
चाँद सितारों से क्यों उलझे,
जीवन की अँधेरी रातों में
अब खुद को हमें चमकाना है।

राहें हैं धुंधली फिर भी चलना,
कदमों को थमने नहीं देना,
टूटी हुई उम्मीदों को भी
फिर से नया आसमान देना।

ख्वाबों का सफ़र रोकें कैसे,
आंधी से डर जाएँ क्यों,
जहाँ सभी ने हार मानी
वहीं जीत का दीप जलाना है।

फूलों को महक दी कुदरत ने,
काँटों को हमें महकाना है,
जो काम किसी से हो ना सका,
वो काम हमें कर जाना है।


दौलत के नशे में चूर हो क्यों,
ताकत पे मगरूर हो क्यों,
दुनिया है तमाशा दो दिन का,
सब छोड़ यहीं पर जाना है।

मंज़िल है पर मंज़िल से बढ़कर
रिश्तों की भी राहें होती हैं,
कुछ पल के लिए मिलने वाले
लम्हों की भी चाहें होती हैं।

झूठे गौरव की चादर ओढ़कर
दिल से कोई अमीर नहीं होता,
इंसान वही जो इंसानियत की
खातिर खुद को झुकाता है।

लफ्ज़ों की कीमत होती है,
लफ्ज़ों का तुम सम्मान करो,
शायद वो हक़ीकत बन जाए
जो लफ्ज़ अभी अफ़साना है।

कल क्या होगा कौन ये जाने,
पल आज का ही सच्चा होता,
हाथों से फिसलते वक़्त को
कुछ तो अपने संग निभाना है।

ऐ दोस्त बहारों का मौसम
हर वक़्त नहीं रहने वाला,
जो आज खिला है गुलशन में
उस फूल को कल मुरझाना है।

पर मुरझाना मंज़िल नहीं है,
फिर मिट्टी में घुलकर देखो,
कल फिर किसी नई कली में
उम्मीद का रंग सजाना है।

ज़िंदगी की राहों में अक्सर,
मौसम बदलते रहते हैं,
जो चलते रहते थक-थक कर भी
वही मंज़िलों तक जाते हैं।

बीते कल की परछाइयों को
दिल पर कभी हावी मत होने दो,
हर सुबह की पहली किरण में
खुद को फिर से जगमगाना है।

फूलों को महक दी कुदरत ने,
काँटों को हमें महकाना है,
जो काम किसी से हो ना सका
वो काम हमें कर जाना है।

हम अपनी कहानी खुद लिखेंगे,
अपनी दुनिया खुद बनाएँगे,
इस जीवन की पगडंडी पर
जज़्बे से आगे बढ़ जाना है…

फूलों को महक कविता का वीडियो - Video of Phoolon Ko Mahak Poem



अस्वीकरण (Disclaimer):

इस कविता की समस्त रचनात्मक सामग्री रमेश शर्मा की मौलिक रचना है। कविता में व्यक्त विचार, भावनाएँ और दृष्टिकोण लेखक के स्वयं के हैं। इस रचना की किसी भी प्रकार की नकल, पुनर्प्रकाशन या व्यावसायिक उपयोग लेखक की लिखित अनुमति के बिना वर्जित है।
Ramesh Sharma

नमस्ते! मेरा नाम रमेश शर्मा है। मैं एक रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट हूँ और मेरी शैक्षिक योग्यता में M Pharm (Pharmaceutics), MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA और CHMS शामिल हैं। मुझे भारत की ऐतिहासिक धरोहरों और धार्मिक स्थलों को करीब से देखना, उनके पीछे छिपी कहानियों को जानना और प्रकृति की गोद में समय बिताना बेहद पसंद है। चाहे वह किला हो, महल, मंदिर, बावड़ी, छतरी, नदी, झरना, पहाड़ या झील, हर जगह मेरे लिए इतिहास और आस्था का अनमोल संगम है। इतिहास का विद्यार्थी होने की वजह से प्राचीन धरोहरों, स्थानीय संस्कृति और इतिहास के रहस्यों में मेरी गहरी रुचि है। मुझे खास आनंद तब आता है जब मैं कलियुग के देवता बाबा खाटू श्याम और उनकी पावन नगरी खाटू धाम से जुड़ी ज्ञानवर्धक और उपयोगी जानकारियाँ लोगों तक पहुँचा पाता हूँ। इसके साथ मुझे अलग-अलग एरिया के लोगों से मिलकर उनके जीवन, रहन-सहन, खान-पान, कला और संस्कृति आदि के बारे में जानना भी अच्छा लगता है। साथ ही मैं कई विषयों के ऊपर कविताएँ भी लिखने का शौकीन हूँ। एक फार्मासिस्ट होने के नाते मुझे रोग, दवाइयाँ, जीवनशैली और हेल्थकेयर से संबंधित विषयों की भी अच्छी जानकारी है। अपनी शिक्षा और रुचियों से अर्जित ज्ञान को मैं ब्लॉग आर्टिकल्स और वीडियो के माध्यम से आप सभी तक पहुँचाने का प्रयास करता हूँ। 📩 किसी भी जानकारी या संपर्क के लिए आप मुझे यहाँ लिख

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