Hindi Diwas Poem, इसमें हिंदी दिवस नामक कविता के माध्यम से हिंदुस्तान की राष्ट्रभाषा हिन्दी की वर्तमान दयनीय हालत को दर्शाने की कोशिश की गई है।
हिंदी दिवस कविता के बोल - Lyrics of Hindi Diwas Poem
हिंदी दिवस के दिन न जाने क्यों हमारा हिंदी प्रेम उमड़ आता है
हर कोई अपने आप को हिंदी भाषा प्रेमी बतलाता है
अंग्रेजी को छोड़ हिंदी भाषा की श्रेष्ठता के गुण गाता है
सोशल मीड़िया पर अपना हिंदी प्रेम दिखाता है
अगले दिन उसका हिंदी ज्ञान ना जाने कहाँ खो जाता है
हिंदी प्रेम प्रदर्शन के लिए प्रतिवर्ष हिंदी दिवस आता है।
फिर दस जनवरी को फिर से हिंदी भाषा को उसका गौरव दिलवाता है
बड़े जोर शोर से वह वर्ल्ड़ हिंदी ड़े यानी विश्व हिंदी दिवस मनाता है
सम्पूर्ण विश्व में एक दिन हिंदी भाषा का ड़ंका जोर शोर से बजाता है
सभी को हिंदी भाषा का महत्व और समृद्धता के बारे में बताता है
आखिर वह हिंदी प्रेमी हैं इसलिए सोशल मीड़िया पर पुनः अपने हथियार उठाता है
हिंदी प्रेम प्रदर्शन के लिए प्रतिवर्ष हिंदी दिवस आता है।
इन दो दिवसों के अतिरिक्त हम सभी ने हिंदी से मुँह मोड़ लिया
गुलामी की भाषा के यशोगान में मातृभाषा से नाता तोड़ लिया
भावनाओं का प्रस्तुतीकरण जो हिंदी में है उसे अनुभव करना छोड़ दिया
संस्कृत की बेटी को यथोचित मान न देकर भावना विहीन भाषा से नाता जोड़ लिया
दिखावटी हिंदी प्रेम के प्रदर्शन के लिए हमें यह एक दिन बहुत भाता है
हिंदी प्रेम प्रदर्शन के लिए प्रतिवर्ष हिंदी दिवस आता है।
शायद ही विश्व में दूसरी कोई मातृभाषा हो जिसके लिए कोई दिवस मनाते हों
शायद ही विश्व में दूसरी कोई मातृभाषा हो जिसकी बदहाली पर आँसू बहाते हों
शायद ही विश्व में दूसरी कोई मातृभाषा हो जो उसके जन्मदाता देश में उपेक्षित हों
शायद ही विश्व में दूसरी कोई मातृभाषा हो जिसे बोलने वाले अशिक्षित समझे जाते हों
शायद इन्हीं वजहों से हिंदी दिवस और विश्व हिंदी दिवस का महत्व बढ़ जाता है
हिंदी प्रेम प्रदर्शन के लिए प्रतिवर्ष हिंदी दिवस आता है।
हिंदी दिवस कविता का वीडियो - Video of Hindi Diwas Poem
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डिस्क्लेमर (Disclaimer)
इस कविता की समस्त रचनात्मक सामग्री रमेश शर्मा की मौलिक रचना है। कविता में व्यक्त विचार, भावनाएँ और दृष्टिकोण लेखक के स्वयं के हैं। इस रचना की किसी भी प्रकार की नकल, पुनर्प्रकाशन या व्यावसायिक उपयोग लेखक की लिखित अनुमति के बिना वर्जित है।
Tags:
Poetry
